क्या गाय एवं भैंस के बछड़े को दूध न पीने देकर खुद उसका इस्तेमाल करना अपराध है ?

किसी का दूध चुराना अपराध है?

में तो कहूंगा जघन्य अपराध है!!

क्यों इंसान पशुओं का दूध चुरा कर पीना चाहता है? में यहाँ चुराना शब्द का प्रयोग करूँगा क्योंकि किसी की कोई चीज़ बिना उसके अनुमति के लेना चोरी की श्रेणी में ही आता है। दूध प्रकृति का वो अनमोल उपहार है जो किसी भी स्तनधारी प्राणी के शरीर में बनता है जब उसके बच्चा पैदा होता है। प्रकृति का यह नियम सभी स्तनधारी प्राणियों पर एक सामान लागू होता है जिसमें इंसान से लेकर गाय, भैंस, बकरी, गधा, कुत्ता और शेर सभी शामिल है।

यहाँ हम विशेषकर गाय भैंसों के सन्दर्भ में समझने की कोशिश करेंगे क्योंकि इन्ही दो पशुओं का दूध इंसान सबसे ज्यादा इस्तेमाल करता है।

इंसान ने अपनी इस चोरी को सभ्य रूप देने के लिए कुछ झूठ फैलाया है जो इतनी बार बोला गया है कि अब सच प्रतीत होने लगा है, लेकिन फिर भी झूठ तो हमेशा झूठ ही रहेगा। इंसान का पशु-दूध का लालच इतना बढ़ गया है कि इसके लिए वह हर तरह का अप्राकृतिक कार्य करने से भी बाज नहीं आ रहा है।

ज्यादा दूध देने वाली कृत्रिम नस्लें विकसित करना , गायों का बलात्कार(कृत्रिम गर्भाधान), उनके बच्चों को मारना और अंत में गाय बूढी होने पर सड़कों पर मरने के लिए छोड़ देना या कत्लखानो को मांस उत्पादन के लिए बेच देना। यह कुछ ऐसे अप्राकृतिक कृत्य हैं और कहना चाहिए कि मूक पशुओं के प्रति किये जाने वाले जघन्य अपराध हैं।

क्या इस तरह की ज्यादा दूध देने वाली भैंस/गाय की नस्ल तैयार करना इन मूक पशुओं के प्रति क्रूरता नहीं है? क्या इनका जीवन असामान्य नहीं है?

इन सारे अपराधों पर पर्दा डालने के लिए कई तरह के झूठ गढ़े गए हैं जैसे एक थन बछड़े का तीन इंसान के लिए, बछड़े के लिए निर्धारित करना कि उसे कितना दूध पिलाना है या नहीं पिलाना है आदि-आदि।

किसी भी प्राणी का स्वतंत्र अस्तित्व होता है और इन्सान अपने लालच के लिए उसे पालता है या कहें की बंदी बना कर रखता है। निश्चित की यह कार्य घृणित, अनैतिक और जानवरों के प्रति अपराध ही कहा जाएगा।

गाय का कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) कैसे होता है?

1 thought on “क्या गाय एवं भैंस के बछड़े को दूध न पीने देकर खुद उसका इस्तेमाल करना अपराध है ?”

  1. ज़ी हां निशचित ही पाप है वन्नस्पति तोडना भी पाप है रोड़ पर चलना भी पाप हे बुद्ध ने संशोधन क़र बताया ज़ीवो ज़ीवस्य भोज़नम

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