Dairy farm की मालकिन कैसे और क्यों बनी वीगन?

Dairy farm की मालकिन की कहानी जो अपने डेयरी फार्म को छोड़ कर वीगन बनी। चार साल तक अपराध बोध के साथ जीने के बाद उन्होंने सदा के लिए डेयरी फार्मिंग छोड़ने का निश्चय किया। यह सब क्यों और कैसे हुआ? पढ़ें उनकी पूरी कहानी।

Dairy farm और जेसिका स्ट्रैथ्डी की कहानी

यह कहानी है न्यूज़ीलैंड की जेसिका स्ट्रैथ्डी की जो अपने पार्टनर के साथ एक डेयरी फार्म चालती थी। स्ट्रैथडी के लिए यह 180 डिग्री का एक पूर्ण मोड़ था, जो 2013 में पश्चिमी कैंटरबरी फार्म में आने से पहले एक स्वघोषित अज्ञानी मांस और डेयरी उपभोक्ता थी।

इससे पहले स्ट्रैथ्डी और उनके पार्टनर ने अपनी पढाई के दौरान एक 600 गायों के फार्म पर बछड़ों की देखभाल समबन्धित कार्य किया था।

दम्पति ने नूज़ीलैण्ड के इस क्षेत्र में काम करना शुरू किया जहाँ लगभग 8400 लोग डेयरी फार्म के कारोबार से जुड़े हुए हैं। यह क्षेत्र लगभग 950000 डेयरी गायों का घर है।

डेयरी नूज़ीलैण्ड के अनुसार इस क्षेत्र के दूध उत्पादन ने 2018 में अर्थव्यवस्था में लगभग 2.6 मिलियन डॉलर का योगदान दिया था। स्ट्रैथ्डी अपने पार्टनर के साथ इस विशाल डेयरी उद्योग का एक भाग बनने पर बहुत प्रस्सन थी, उन्हें गायों का दूध निकालना और उनके बछड़ों के बीच रहना अपने परिवार के साथ रहने के सामान लगता था।

यद्यपि वह जानती थी कि गायों के दूध देने के लिए बछड़ों का उनके पास रहना जरुरी होता है लेकिन फिर भी स्ट्रैथ्डी ने कभी भी बछड़ों को उनकी माँ से अलग किये जाने पर कभी गहराई से नहीं सोचा था।

कैसे स्ट्रैथ्डी का हृदय परिवर्तन हुआ?

एक दिन स्ट्रैथ्डी का पार्टनर हमेशा की तरह नवजात बछड़ों को उनकी माँ से अलग कर गाडी में डाल कर ले जा रहा था कि स्ट्रैथ्डी का ध्यान उन बछड़ों के ढेर पर गया जो गाडी में एक के ऊपर एक पड़े हुए थे, उनकी नाभि अभी भी खून से सनी हुई थी। उसने एक पल के लिए सोचा कि क्या यह असली बछड़े हैं?

उन्हें एक क्षण के लिए अहसास हुआ कि गायों से दूध लेने के लिए यह क्या किया गया है। वे मशीन नहीं थे वे किसी माँ के बच्चे थे जो अपनी माँ की ममता चाहते थे।

डेयरी नूज़ीलैण्ड की रणनीतिक और निवेश सलाहकार डॉ जेनी जागो के अनुसार पशु कल्याण “डेयरी किसानों के लिए बिल्कुल महत्वपूर्ण है” क्योंकि वे किसान अपनी गायों की अच्छे से देखभाल करते हैं।

डॉ जागो का कहना है कि बहुत से लोग बछड़ों को अपनी माँ से अलग करने के खिलाफ है क्योंकि बछड़े को इससे कोलोस्ट्रम दूध पर्याप्त मात्रा में मिलता है जो संक्रमण के जोखिम को कम करता है और उन्हें ऊर्जा प्रदान करता है। लेकिन बछड़ों को अलग करना डेयरी उद्योग के लिए फ़ायदेमंद है।

जागो का कहना है कि बछड़ों को आमतौर पर 24 घंटे के भीतर उनकी माँ से अलग कर दिया जाता है, क्योकि इससे ज्यादा समय तक साथ रखने पर उन्हें अपनी माँ के दूध की ज्यादा आवश्यकता होने लगती है, इसलिए उन्हें अलग से समूहों में बड़ा किया जाता है जहाँ वह एक साथ खेलते और बड़े होते हैं।

लेकिन स्ट्रैथ्डी का कहना है कि देश के डेयरी फार्मों में हर सीजन में पैदा होने वाले लगभग पांच मिलियन बछड़ों में से लगभग 30 प्रतिशत को प्रतिस्थापन डेयरी मवेशी और 30 प्रतिशत को गौमांस के लिए तैयार किया जाता है। शेष नर बछड़े जो कि आवश्यकता से अधिक हैं उन्हें जन्म के कुछ घंटों में ही अपनी माँ से हमेशा के लिए अलग कर बूचड़खाने के लिए भेज दिया जाता है ताकि हमें उनकी माँ का दूध मिलता रहे।

स्ट्रैथ्डी ने आगे लिखा है कि dairy farm में काम करने के दौरान मासूम बछड़ों के साथ जो कुछ होता हुआ देखा उससे मुँह मोड़ना संभव नहीं था। वह अगले 2 सप्ताह तक हर दिन रोती रही। ऐसे ही समय निकलता गया लेकिन चौथे सीजन तक उसका धैर्य जवाब दे गया और वह अंदर से पूरी तरह से टूट गयी थी।

स्ट्रेथ्डी का कहना है कि अब इससे ज्यादा उसका इस फार्म में जीवित रहना संभव नहीं था और अपने पार्टनर के साथ 16 वर्ष रहने के बावजूद उसने फार्म को छोड़ने के फैसले से अपने पार्टनर को अवगत करा दिया।

जब उसने अपने पार्टनर लिम्बे से बात की तो उसने भी कहा कि वह भी यह सब देख कर टूट गया है और अब अपराध-बोध के साथ आगे यहाँ काम नहीं कर सकता।

अंतत: दोनों ने dairy farm छोड़ने के साथ यह भी फैसला किया कि इस फार्म से बाहर निकलते ही दोनों वीगन हो जायेंगे।

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वीगन बनने के बाद का जीवन

फार्म छोड़ने के बाद स्ट्रैथ्डी animal right activist बन गयी और दोनों ने आजीवन वीगन जीवन जीने की प्रतिज्ञा ली।

फार्म को छोड़ने पर एक सकून का अहसास तो था लेकिन उन गायों और बछड़ों के भविष्य के बारे सोच कर मन में एक पीड़ा भी थी जिन्हे वे फार्म में अपने भाग्य पर छोड़ आये थे। स्ट्रैथडी का कहना है कि वह वहां से निकलने के बाद भी डेयरी फार्म की यादों में डूबी रही और गायों को उनके हाल में छोड़कर आने पर अपराध बोध महसूस कर रही थी।

यह जोड़ी अभी भी ग्रामीण कैंटरबरी में रहती है, और स्ट्रैथ्डी अब दो बच्चों की माँ है। वह वीगनिस्म और पशु अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने वाली एक मुखर प्रचारक भी है। उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका स्थित समूह Mothers Against Dairy (MAD) की न्यूजीलैंड शाखा की भी स्थापना की है।

MAD के तहत स्ट्रैथडी ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया और उनका कहना है कि लोग अब जाग रहे हैं और जानना चाहते हैं कि फार्म्स में वास्तव में क्या होता है और उनका भोजन कहाँ से और कैसे आता है।

जब नूज़ीलैण्ड की प्रधानमन्त्री जैकिंडा अर्डर्न ने कहा कि वह वीगन नहीं बन सकती क्योंकि उन्हें चीज़ बहुत पसंद है तब स्ट्रैथडी ने एक एक पशु अधिकार मार्च के दौरान नूज़ीलैण्ड की प्रधानमन्त्री अर्डर्न से पशु कल्याण को गंभीरता से लेने का आग्रह किया।

स्ट्रैथ्डी की dairy farm छोड़ने और animal right activist बनने के बाद की चुनौतियां

स्ट्रैथ्डी का कहना है कि उनके प्रचार की सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की प्रतिक्रियाएँ हुई हैं।

उन्हें बहुत से उन लोगों ने भी संपर्क किया है जो dairy farm में काम करते समय उन्हीं मानसिक उलझन से गुज़र रहे हैं जिससे वह गुज़र चुकी है। वह उन सभी से हुई बातचीत को एक जीत के रूप में देख रही है।

उन्हें लोगों की घृणा का भी सामना करना पड़ा है और कई बार जान से मारने की धमकियाँ भी मिली है। कई लोगो ने उनके खिलाफ उच्च अधिकारियों से शिकायत करने की बात की है कि हम अपने बच्चों को वीगन बना कर बड़ा कर रहे हैं जो उनके अनुसार बच्चों का शोषण करने के सामान है।

लेकिन इसके जवाब में उनका कहना है कि उसके बच्चे हष्ट-पुष्ट और स्वस्थ्य हैं, और जो कोई भी उन्हें जानता है वह ऐसी बात कभी नहीं करेगा कि हम अपने बच्चों को कैसे पाल पोस कर बड़ा कर रहे हैं।

उनका कहना है कि किसी मातृत्व के शोषण का और कोई गलत काम करने का इससे अच्छा कोई तरीका नहीं है। उनका यह भी मानना है कि डेयरी का दीर्घकालिक भविष्य नहीं है।

वह डेयरी किसानों के इस दावों को भी खारिज करती है कि वह अपनी गायों से प्यार करते हैं। हाँ वह किसी पशु के खोने से टूट सकते हैं लेकिन साथ ही वह बछड़ों को उनकी माँ से अलग करने पर एक पल भी विचार नहीं करते।

वह गायों के साथ किये गए इस तरह के व्यवहार को उनसे प्यार करना नहीं मानती क्योकि वही किसान कभी भी अपने कुत्तों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं करेंगे जैसा अपनी गायों के साथ करते हैं।

उनका डेयरी उद्योग पर भी सीधा आरोप है कि यहाँ काम करने वाले लोगों को इस तरह से ढाला जाता है कि उनके काम में वह संवेदनहीन हो जाते हैं।

हालाँकि डेयरी नूज़ीलैण्ड की रणनीतिक और निवेश सलाहकार डॉ जेनी जागो का कहना है कि dairy farm में काम करने वाले न तो संवेदनहीन होते हैं न ही जो कुछ वह करते हैं उसका उन्हें अपराध बोध होता है, वह सब अपने जानवरों से बेहद प्यार करते हैं। न्यूजीलैंड में 12,000 डेयरी किसान हैं जो जानवरों की देखभाल करते हैं, और उनके साथ काम करने का आनंद लेते हैं।

स्ट्रैथडी का कहना है कि वह कभी भी पशु-प्रेमी नहीं थी। एक सुंदर अहसास लेकिन विडंबना यह हुई कि डेयरी से जाने के बाद उनके मन में उन गायों के प्रति बहुत करुणा और प्यार है जिनका वहां निरंतर शोषण हो रहा है। “मैं चाहती हूं कि मैं उन सभी की रक्षा कर सकूं, और उन्हें स्वतंत्र जीवन दे सकूं, जिसके वे योग्य हैं, उतने ही जितने हम में से कोई भी स्वतंत्र जीवन जीने योग्य है।”

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