गाय इंसानों के लिए दूध पैदा करती है: हकीकत या मिथ्या?

गाय इंसानों के लिए ही दूध पैदा करती है और गायें बछड़े की जरूरत से कहीं ज्यादा दूध पैदा करती है, ऐसी एक आम धारणा समाज में बनी हुई है। क्या है इसके पीछे का सच? आईये जाने।

क्या गाय इंसानों के लिए दूध पैदा करती है या बछड़ों के लिए?

जब भी कोई बात समाज में स्वीकार्य हो जाती है तो वही सच लगने लगती है। उसके पीछे का सच जानने की कोई कोशिश नहीं की जाती और अगर सच को उजागर करने का प्रयास किया भी जाता है तो उसकी आवाज़ को दबाने की भी पूरी कोशिश की जाती है।

कुछ तथ्य जो कहते हैं कि गाय जरूरत से ज्यादा दूध देती है

गायें 25-30 लीटर या अधिक दूध प्रतिदिन देती है

यह सच है कि आजकल गायों की कई ऐसी प्रजातियां विकसित कर ली गयी है जो इतना दूध पैदा करती है जो बछड़े के लिए जरूरत से ज्यादा हो सकता है। लेकिन जो दीखता वह जरुरी नहीं कि सम्पूर्ण सत्य भी होता है। है इसके पीछे का सच क्या है यह जानना जरुरी है।

क्या है सत्य इन विशाल थन वाली ज्यादा दूध देने वाली गायों का ?

क्या इस तरह की नस्लें इंसानों की गुलाम नहीं है जिनका अपना कोई अस्तित्व नहीं होता वह सिर्फ इंसान के रहमों करम पर ही अपना पूरा जीवन बिता देती है।

क्या अगर 25-30 लीटर दूध देने वाली गाय का बछड़ा 10-15 लीटर भी दूध पीना चाहे तो उसको कोई भी डेयरी वाला पीने देगा?

उनका पैदा होना और मृत्यु भी इंसानों पर ही निर्भर होता है। इंसान अपने दूध की चाह के कारण उन्हें कृत्रिम गर्भाधान के जरिया पैदा करवाता है और जब वह दूध देने लायक नहीं रहती तो उसकी हत्या कर मांस उत्पादन किया जाता है अथवा सड़कों पर आवारा मरने के लिए छोड़ दिया जाता है।

आप यहाँ देख सकते हैं कि दुनिया की 10 सबसे ज्यादा दूध पैदा करने वाली गायें कृत्रिम तरीके से तैयार की गयी है। कोई भी गाय प्राकृतिक अवस्था में बछड़े की जरूरत से ज्यादा दूध नहीं पैदा करती है।

क्या समस्यायें होती है विशाल थन के कारण

चयनात्मक प्रजनन(selective breeding) के माध्यम से इन गायों मेंअपने बछड़े के लिए प्राकृतिक रूप से जरुरत की तुलना में छह से 10 गुना अधिक उत्पादन होता है लेकिन गायों को इसकी भारी कीमत भी चुकानी पड़ती है। उसके विशाल थन के कारण उनका चलना फिरना और बैठना भी मुश्किल हो जाता है। उसके शरीर में ज्यादा दूध उत्पादन के दबाव के कारण चयापचय तनाव(metabolic stress) इतना ज्यादा होता है कि यह अक्सर उनमें  गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं (जैसे कि कैल्शियम की कमी, जिसके परिणामस्वरूप fever दूध बुखार) का कारण बनता है।

दूध का बुखार निम्न रक्त कैल्शियम के स्तर के कारण होने वाला रोग है। दूध निकालने के पहले कुछ दिनों में यह सबसे आम है, जब दूध के उत्पादन के लिए कैल्शियम की मांग शरीर में कैल्शियम संग्रहण क्षमता से अधिक हो जाती है। हालांकि, यह किसी भी समय हो सकता है जब गाय एक साथ गर्भवती और स्तनपान कर रही है, जो कि आमतौर पर डेयरी उद्योग में एक standard practice  है।

निम्न रक्त कैल्शियम का स्तर पूरे शरीर में सामान्य मांसपेशी कार्य को बाधित करता है, जिससे सामान्य कमजोरी, भूख नहीं लगना, खड़े होने में कठिनाई, उठने में असमर्थता और अंत में heart failure की संभावनाएं बढ़ जाती है।  इसका इलाज किया जा सकता है लेकिन समस्या का पता चलने से पहले ही कई गायों की मौत हो जाती है।

कम कैल्शियम का स्तर (हाइपोकैल्सीमिया) स्वाभाविक रूप से पुराने जानवरों और कुछ नस्लों (जैसे जर्सी मवेशी) में अधिक सामान्य है, लेकिन डेयरी उद्योग की उच्च मांगों के कारण, युवा गायों में भी दूध का बुखार होने लगता है।

गाय के 4 थन होते हैं

हाँ होते हैं चार थन, लेकिन इसका क्या यह मतलब है कि वह जरूरत से ज्यादा दूध देती है? ऐसे तो हर स्तनधारी पशु के एक से अधिक थन होते हैं। प्रकृति ने क्यों किसी माँ के एक से अधिक थन दिए हैं ?

गाय के चार थन होने के क्या कारण है?

वास्तविकता यह है कि गाय के थन एक ही होता है लेकिन उसके चार भाग होते हैं। प्रकृति की कोई भी रचना बेवजह नहीं होती, उसके पीछे कोई न कोई कारण होता है।

वैसे तो गायों के एक समय में एक ही बछड़ा होता है लेकिन कभी कभी जुड़वां भी हो सकते हैं, ऐसी स्थिति में अगर गाय एक के थन का एक या दो ही भाग हो तो जुड़वां बच्चों को अपना भोजन प्राप्त करने में संघर्ष करना पड़ सकता है। शायद इसी कारण प्रकृति ने इस तरह की व्यवस्था की है।

दूसरी महत्वपूर्ण बात अगर थन का एक ही भाग होता और किसी कारण वश वह रोग या चोट ग्रस्त हो जाए तो बछड़े का क्या होगा ? वह बछड़ा जो सिर्फ अपने माँ के दूध पर ही जीवित रह सकता है उसको अपना भोजन नहीं मिल सकेगा। प्रकृति इतनी क्रूर नहीं है, इसलिए उसने पहले से ही इस तरह की व्यवस्था कर रखी है।

हम कितने चतुर और चालाक होते हैं कि हर चीज़ का मतलब अपनी सुविधा अनुसार निकल लेते हैं। अब प्रकृति ने गाय के थन के चार भाग बनाये तो हमने अपनी दूध की लालसा को बिना किसी हीन भावना के पूरी कर सकें इसलिए बछड़े के लिए सिर्फ एक भाग घोषित कर दिया और 3 भाग अपने लिए रख लिए।

यह बंटवारा किसने और किस आधार पर किया होगा यह तो पता नहीं परन्तु इसमें इंसान का स्वार्थ अवश्य दिखाई पड़ता है। अगर यह सत्य होता तो क्यों

  • गायों का दूध निकालते समय उनके पैर बांध दिए जाते हैं ?
  • क्यों गाय के बछड़े को दूर कर धोखे से उसका दूध निकला जाता है?

प्राकृतिक अवस्था में कैसी होती है गायें ?

प्राकृतिक अवस्था में गायें बिकुल वैसी ही होती है जैसे कोई भी अन्य पशु रहता है। प्राकृतिक रूप से उनकी वंश वृद्धि होती है और उनकी संख्या बढ़ने पर प्रकृति स्वयं ही उनकी संख्या पर नियंत्रण करती है।

लेकिन डेयरी उद्योग ने गायों का पूरी तरह मशीनीकरण कर दिया है और उनका जीवन इंसानों के हाथों में ही रहता है।

प्राकृतिक अवस्था में किसी गाय के बच्चा होने पर वह अपनी माँ के उतना ही करीब होगा जितना कि कोई अन्य जानवर या इंसान का बच्चा अपनी माँ के करीब होता है। प्रकृति की यह व्यवस्था है कोई भी बच्चा जो अपनी माँ के दूध पर पूर्णत: निर्भर होता है अपनी आवश्यकतानुसार सीधा अपनी माँ के स्तनों से दूध ग्रहण करता है। यह बात गाय पर भी लागू होती है।

डेयरी उद्योग में किसी भी बछड़े को इसकी इजाजत नहीं होती कि वह अपनी जरूरत के अनुसार अपनी माँ का दूध पी सके इसलिए उसे अपनी माँ से अलग रख गाय के थनों में दूध इकट्ठा होने दिया जाता है और जो दूध बछड़े को दिन भर में थोड़ा-थोड़ा कर पीना चाहिए उसे इंसान एक साथ निकल लेता है। इससे ऐसा आभास होता है कि गाय इतना दूध देती है जो बछड़ा पी ही नहीं सकता और अगर पियेगा तो बीमार भी पड सकता है।

शायद इतना जानने के बाद यह कहना उचित नहीं होगा कि गाय इंसानों के लिए दूध देती है।

घर पर गाय पालन करना और उसका दूध निकलना कितना सही है?

Be the first to reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *