प्रोस्टेट कैंसर और दूध का रिश्ता!

दूध को जितना पवित्र और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता रहा है यही धारणा अब धीरे-धीरे विभिन्न शोधों से टूटती जा रही है। सिर्फ पुरुषों में होने वाले प्रोस्टेट कैंसर में दूध की भूमिका भी अब विभिन्न शोधों से सामने आने लगी है।

हृदय रोग, मोटापा, मधुमेह आदि में तो दूध पहले से गुनहगार है ही लेकिन कैंसर में दूध की भूमिका अब डेयरी उत्पाद के उपभोक्ताओं के लिए चेतावनी से कम नहीं है।

कोई भी बीमारी का सिर्फ एक कारण नहीं होता वैसे ही दूध ही सिर्फ prostate cancer का कारण नहीं कहा जा सकता लेकिन दूध का लम्बे समय तक नियमित उपयोग इसकी संभावनाओं को काफी हद तक बढ़ा देता हैं।

क्या कहता है प्रोस्टेट कैंसर के बारे में शोध?

The American Association for Cancer Research.

प्रोस्टेट कैंसर और आहार के संबंधों पर जानकारी हेतु एक शोध किया गया। स्वास्थ्य अध्ययन में भाग लेने वाले कुल 926 पुरुषों में नॉनमैस्टैटिक प्रोस्टेट कैंसर का निदान किया गया

निदान के बाद 5.1 वर्ष के माध्यक(median) के लिए आहार प्रश्नावली पूरा किया, और उसके बाद प्रश्नावली पूरा होने के बाद 9.9 की माध्यक(median) अवधि के लिए मृत्यु दर का आकलन किया गया।

निदान के बाद के दो आहार पैटर्न की पहचान की गई एक विवेकपूर्ण पैटर्न : सब्जियों, फलों, फलियां और साबुत अनाज सेवन करने वाले और दूसरा पश्चिमी पैटर्न : जिसमें संसाधित लाल मीट, उच्च वसा वाले डेयरी उत्पाद और परिष्कृत अनाज का अधिक सेवन करने वालों को शामिल किया गया

पश्चिमी पैटर्न में प्रोस्टेट कैंसर का ज्यादा जोखिम था और मृत्यु दर ज्यादा थी जबकि विवेकपूर्ण पैटर्न में मृत्यु दर बहुत कम पायी गयी।

Source – Cancer prevention research

दूध कैसे जिम्मेदार है?

हार्मोन जैसे इंसुलिन growth factors (IGF-I) , दूध में उपस्थित संतृप्त वसा, कैल्शियम और प्रोटीन prostate cancer के खतरों से जुड़े हैं। इसके अतिरिक्त रेड और प्रोसेस्ड मीट और अंडे भी प्रोस्टेट कैंसर के बढ़ते खतरे के लिए जिम्मेदार हैं।

वनस्पति आधारित भोजन के कम होता है प्रोस्टेट कैंसर का खतरा

अनुसंधान से पता चलता है कि पौधे आधारित आहार से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा कम हो सकता है और निदान होने पर इसकी प्रगति धीमी हो सकती है। लाइकोपीन से समृद्ध फल और सब्जियां (टमाटर, तरबूज और गुलाबी अंगूर में पाया जाने वाला चमकदार लाल रंग) विशेष रूप से फायदेमंद हो सकता है।

हार्वर्ड हैल्थ प्रोफेशनल्स फॉलो-अप स्टडी के आंकड़ों के मुताबिक, जो पुरुष टमाटर की चटनी का सेवन करते हैं, उनकी हफ्ते में दो बार टमाटर की चटनी खाने से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा 23 प्रतिशत कम होता है। Cruciferous vegetables (जैसे ब्रोकोली, गोभी और ब्रसेल्स स्प्राउट्स) भी इस कैंसर से सुरक्षा प्रदान करती हैं।

भारत की स्थिति

भारत में होने वाले 10 प्रमुख कैंसर में से यह एक है। दिल्ली, कोलकाता, पुणे और तिरूवनंपुरम में दूसरा और बेंगलुरू और मुबंई जैसे शहरो में होने वाले कैसरो में तीसरे स्थान पर आता है।

यह रोग त्रीव गति से फ़ैल रहा है यह अनुमान लगाया जा रहा हैं कि 2020 तक भारत में प्रोस्टेट कैंसर के मामले दुगुने हो जायेंगे। India Against Cancer

क्या शाकाहारी लोगों को प्रोटीन की जरूरत के लिए दूध पीना जरुरी है?

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