दूध पीना सेहत के लिए अच्छा है या बुरा?

दूध पीना इंसान आदत में शामिल हो गया है। दूध एक शिशु आहार है और किसी भी माँ के दूध तब तक आता है जब तक कि उसका बच्चा ठोस आहार लेने लायक नहीं हो जाता। इस जगत में सिर्फ इंसान ही ऐसा प्राणी है जो दूसरी प्रजाति का दूध पीता है, वो भी उम्र भर।

दूध पीना अमृत सामान है लेकिन सिर्फ और सिर्फ अपनी माँ का।

हर प्रजाति की माँ का दूध उसके बच्चे की आवश्यकता के अनुसार प्रकृति ने बनाया है और वह सिर्फ उसी प्रजाति के लिए अमृत होता है। एक पल के लिए सोचिये क्या हो अगर गाय के बछड़े को इंसान का दूध पिलाया जाए? क्या आपको लगता है कि इसकी मात्रा और पोषण उसके लिए पर्याप्त होंगे? नहीं न? तो फिर गाय भैंस का दूध कैसे इंसान के लिए सेहतमंद हो सकता है? जो बछड़ा वो दूध पी कर कुछ ही दिनों में 15 से 100 किलो का हो जाता है वही दूध अगर इंसान रोज़ पीये तो क्या यह उसके स्वस्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है?

One common argument against dairy products is that it is unnatural to consume them. Not only are humans the only species that consumes milk in adulthood, but they are also the only one to drink the milk of other animals. Biologically, cow’s milk is meant to feed a rapidly growing calf.

क्या है दूध का सच ?

पशु दूध पीने के पीछे कई तर्क दिए जाते हैं और उसके कई फायदे भी गिनाये जाते हैं। यह सब एक डेयरी उद्योग द्वारा फैलाया गया भ्रम है। अगर दूध इतना ही सेहत मंद होता तो आज जब इतहास में सबसे ज्यादा दूध पीया जा रहा है इतनी बीमारिया नहीं होती। आज जब यह साबित हो चुका है कि पशु दूध कई बिमारियों जैसे हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, ऑस्टोफोरोसिस, कैंसर का कारक है तो कैसे इसे एक सम्पूर्ण आहार और स्वास्थ्यवर्धक आहार कहा जा सकता है?

पशु दूध न सिर्फ हमारी सेहत का दुश्मन है अपितु इतनी भारी मात्रा में दूध उत्पादन के लिए किये जाने वाला पशुपालन और पशुओं की बढ़ती संख्या ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन की भी मुख्य कारण है जो कई शोध में साबित भी हो चुका है।

पशु दूध पीना न सिर्फ हमारी सेहत का दुश्मन है अपितु इतनी भारी मात्रा में दूध उत्पादन के लिए किये जाने वाला पशुपालन और पशुओं की बढ़ती संख्या ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन की भी मुख्य कारण है जो कई शोध में साबित भी हो चुका है।

मैं न सिर्फ दूध को स्वस्थ्य नाशक कहूंगा अपितु अनैतिक भी कहूंगा, चूँकि किसी भी माँ के दूध पर सिर्फ और सिर्फ उसके नवजात बच्चे का ही हक होता है।

किसी भी मादा के दूध तभी आता है जब उसके बच्चा पैदा होता है, क्या इतना सा प्रकृति का इशारा बुद्धिमान इंसान नहीं समझ सकता? बिलकुल समझता है लेकिन दूध का मायाजाल ऐसा फैला दिया गया है कि उसमें सारी बुद्धिमानी गौण हो गयी है।

सेहत के अतिरिक्त दूध अनैतिक भी है। इस बारे में आप विस्तार से अन्य पोस्ट में पढ़ सकते हैं।

क्या अब समय आ गया है डेयरी को ना कहने का?

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2 thoughts on “दूध पीना सेहत के लिए अच्छा है या बुरा?

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