क्या सिर्फ दूध पीकर कोई सारी उम्र स्वस्थ रह सकता है?

सारी उम्र स्वस्थ्य रहने की बात तो बहुत दूर है। सिर्फ दूध पी कर एक व्यस्क आदमी कुछ ही दिनों में बीमार पड जाएगा वहीँ अपनी माँ का दूध जन्म के शुरूआती 6 माह तक पीने से बच्चे का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होता है।

हम दूध के बारे में एक बात हमेशा भूल जाते हैं कि दूध एक शिशु आहार है जो बच्चे के जन्म के बाद माँ के शरीर में पैदा होता है जिस पर सिर्फ और सिर्फ उसी बच्चे का ही अधिकार होता है।

अपनी माँ का दूध पीने के बाद आजीवन स्वस्थ्य जीवन जीने के लिए किसी भी प्रकार के दूध की कोई आवश्यकता नहीं होती। मनुष्य आजीवन जो जानवरों का दूध पीता है वह सिर्फ लालच और मूर्खता के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है। प्रकृति ने जो दूध गाय या भैंस के शरीर में बनाया है वह इंसानी दूध से बिलकुल भिन्न होता है। प्रकृति ने हर पशु का दूध उसके बच्चे की आवश्यकता के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया है जो सिर्फ उसी के बच्चे के लिए अमृत सामान होता है अन्य प्रजाति के लिए नहीं।

मनुष्य जो मरते दम तक जानवरों का दूध पीता रहता है वह न केवल स्वस्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है अपितु सर्वथा अनैतिक भी है। आज कई शोध से सिद्ध हो चुका है कि पशुओं के दूध का सेवन करने से अत्यंत गंभीर बीमारियां जैसे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, ओस्टोपोरोसिस , कैंसर, मधुमेह, प्रोस्टेट, थाइरोइड आदि होने की सम्भावना कई गुना बढ़ जाती है। आज जब इतिहास में सर्वाधिक पशु-दूध का सेवन किया जा रहा है तभी यह सब बीमारियां भी अपने चरम पर है।

पशुओं के दूध का सेवन अनैतिक इसलिए है क्योकि पहली बात कि किसी भी पशु के शरीर में दूध इसलिए पैदा नहीं होता कि इंसान को पीना है, शरीर में दूध सिर्फ और सिर्फ तभी बनता है जब उसके बच्चा पैदा होता है। यह प्रकृति का स्पष्ट संकेत है कि दूध नवजात बच्चे के लिए ही है।

लेकिन जब हम उस दूध को पीना चाहते हैं तो यहीं से शुरू होता है पशुओं पर होने वाले निरंतर अत्याचारों का सिलसिला। जिसमे मादा पशु के बलात्कार (कृत्रिम गर्भाधान), नवजात की हत्या और उसको उसकी माँ से जुदा करना और अंत में जब पशु फायदेमंद न रहे तो उसे कत्लखाने को बेच देना या सड़कों पर खुले आवारा घूमने के लिए छोड़ देना। क्या यह सब कृत्य हमारे नैतिक मूल्यों का पतन नहीं है?

दूध के बारे में डेयरी उद्योग और सरकारों द्वारा कई भ्रांतियां फैलाई जा रही है इसलिए दूध को सफ़ेद झूठ भी कहा जाता है।

यदि हमें एक स्वस्थ जीवन जीना है तो शुद्ध शाकाहार (सिर्फ पेड पौधों से प्राप्त) भोजन करना ही उत्तम मार्ग है।

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