गाय के दूध में सोना(Gold) होता है, कितना सच कितना झूठ?

गाय के दूध में सोना होता है ” जी हाँ आजकल देशी गाय विशेषकर गीर गाय के बारे में किसी शोध के हवाले यह ख़बर बहुत तेजी से फ़ैल रही है।

गाय के दूध में सोना होता है, क्या है हकीकत ?

अभी तो इस बात में ही विरोधाभास है कि गाय के दूध में सोना पाया गया कि मूत्र में? यहाँ हम मान लेते हैं की दूध और मूत्र दोनों में सोना पाया जाता है।

अगर वैज्ञानिकों की मानें जिन्होंने गाय के मूत्र में सोना ढूंढा तो इसे कोई बहुत बड़ी खोज कहना न्यायोचित नहीं होगा। सबसे पहले यह समझना होगा कि किसी भी प्राणी का मूत्र क्या होता है?

अगर किसी भी प्राणी के मूत्र का प्रयोगशाला में विश्लेषण किया जाए यहाँ गाय का उदाहरण लें तो उसमें कई प्रकार के घुलनशील लवण पाए जाते हैं जैसे नाइट्रोजन, सल्फर, फॉस्फेट, सोडियम, मैंगनीज, लोहा, सिलिकॉन, क्लोरीन, मैग्नीशियम, मेलिक, साइट्रिक, टार्टरिक और कैल्शियम लवण, विटामिन ए, बी, सी, डी, ई, खनिज, लैक्टोज, एंजाइम, क्रिएटिनिन, हार्मोन इत्यादि।

किसी प्राणी का मूत्र और दूध क्या होता है?

आजकल गाय के दूध में एंटीबायोटिक और हार्मोन के अंश भी पाए जाते हैं तो निश्चित ही गाय के मूत्र में भी पाए जाते होंगे। यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि मूत्र में इतने सारे खनिज, लवण, एंटीबायोटिक और हार्मोन आते कहाँ से है? क्या इन सब का शरीर में निर्माण होता हैं? क्या किसी प्राणी का शरीर इन धातुओं का निर्माण कर सकता है? शायद नहीं।

मूत्र में पाए जाने वाले सभी पदार्थ किसी भी प्राणी के खान-पान और मेटाबोलिज्म पर निर्भर करते हैं। जब हम बीमार होते हैं तो मूत्र परीक्षण किया जाता है जिससे उसमें पाए जाने वाले तत्वों से कई बिमारियों का पता चलता है।

मूत्र द्वारा शरीर के अपशिष्ट पदार्थ बहार निकलते हैं जबकि दूध किसी भी बच्चे का भोजन होता है। दूध पिलाने वाली माँ को अकसर यह हिदायत दी जाती है कि उसे बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवाई नहीं खानी चाहिए और खान-पान भी पौष्टिक रखना चाहिए, क्यों? क्योंकि जो माँ खायेगी उसी से दूध का निर्माण भी होता है और अगर आहार में कोई दवाई या अन्य हानिकारक तत्व होंगे तो उसका अंश दूध में भी आ जाता है जो की बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है।

गाय के दूध या मूत्र में सोने के अंश पाए जाने की क्या है सच्चाई ?

इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि किसी पशु के दूध या मूत्र में सोने के अंश पाए जाएँ। क्योंकि जैसा कि यह वैज्ञानिक तथ्य है कि मूत्र या दूध में पाए जाने वाले लवण का स्त्रोत हमारा भोजन ही होता है।

“दूध में सोना होता है” इस बात को महिमा मंडित क्यों किया जा रहा है?

आस्था

हमारे देश में गाय के प्रति जो आस्था है उसको नयी उचाईयों पर ले जाने का एक षड्यंत्र हो सकता है। क्योंकि जहाँ आस्था होती है वहां शंका उत्पन्न नहीं होती।

व्यवसाय

आज दूध का उत्पादन एक बहुत बड़ा व्यवसाय बन गया है। अगर किसी उत्पाद में कुछ अतिरिक्त गुण जोड़ दिए जाएं तो उसकी बाज़ार में कीमत और भी बढ़ जाती है।

यहाँ यह बिलकुल महत्वपूर्ण नहीं है कि मूत्र में स्वर्ण के अंश पाए गए , उससे भी ज्यादा महत्पूर्ण यह है कि इसकी आड़ में गाय के दूध को महिमामंडित करने का एक नया बहाना मिल गया है।

अगर इस बात को मान भी लिया जाए कि गाय के दूध या मूत्र में सोने के अंश पाए गए हैं तो दो संभावनाएं हो सकती है –

  • गाय के दूध को विशेषकर गीर गाय को और भी महिमामंडित करने और उसकी कीमत बाजार में बढ़ाने के लिए यह प्रायोजित परीक्षण किये गए होंगे। परीक्षणों पर कोई ऊँगली न उठा सके इसलिये हो सकता है गायों के आहार में कोई स्वर्ण भस्म या अन्य स्वर्ण लवण मिलाये गए होंगे।
  • दूसरी सम्भावना यह हो सकती है कि गायों को खिलाये जाने वाले आहार में प्राकृतिक रूप से सूक्ष्म मात्रा में स्वर्ण लवण मौजूद हो। ऐसा हो सकता है अगर उनका आहार ऐसी जगह उगाया गया हो जहाँ की मिटटी में स्वर्ण अंश मौजूद हो।

लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि अगर इन परीक्षणों को प्रायोजित न भी माना जाये और दूसरी सम्भावना सही हो तो वैज्ञानिकों ने अपने आगे खोज की दिशा को इस और क्यों नहीं मोडा की अगर गाय के दूध या मूत्र में स्वर्ण अंश आया तो कहाँ से आया ?

हो सकता है सच्चाई को छिपा कर हमारी गाय के प्रति श्रद्धा और आस्था का गलत फायदा उठा कर सिर्फ इस बात को ही प्रचारित किया गया कि गाय के दूध और मूत्र में सोने के अंश पाए जाते हैं जिससे आस्था और भी मजबूत होगी और एक गाय विशेष के दूध और उसकी कीमत में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।

क्या अब हिन्दू संगठनों को भी गौ हत्या से एतराज़ नहीं है?

राजनितिक बयानबाजी

जब इस तरह आस्था से जुड़ा कोई मुद्दा होता है तो राजनेता भी अपनी रोटियां सेंकने से बाज नहीं आते। राजनेताओं को इससे कोई मतलब नहीं होता कि बात में कितनी सच्चाई है। बस एक भावनात्मक मुद्दा होता है जिसको उछालने से नहीं चूकते क्योंकि इन्हे पता है श्रद्धा और आस्था में डूबी जनता कोई विरोध नहीं करेगी और उन्हें इसका राजनितिक फायदा मिल जायेगा।

इसी तरह का बयान पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के नेता ने भी दिया और राजनितिक लाभ लेने की कोशिश की। इससे नुकसान यह होता है कि लोग किसी बात की सच्चाई की तह तक जाए बिना उसे सच मानने लगते हैं और यह सिलसिला आगे बढ़ता रहता है।

BJP Bengal chief Dilip Ghosh’s latest: ‘Desi cow milk contains gold, therefore yellowish in colour’

मीडिया का प्रोपोगेंडा

मीडिया को भी जब इस तरह के समाचार हाथ लगते हैं तो ज्यादातर मीडिया बिना सच जाने ख़बरों को इस तरह पेश करते हैं जो लोगो की भावनाओं के अनुकूल हो। इस तरह की पत्रकारिता भी आस्था और श्रद्धा को और भी मजबूत बनने का काम करती है जिसमें सच और तर्क कहीं गुम हो जाते हैं।

यह है प्रतिष्ठित आज तक का प्रोपोगेंडा गाय दूध ही नहीं सोना भी दे रही है, यकीन न हो तो यहां आकर देखें…

ज़ी न्यूज़ की माने तो दूध ही नहीं सोना भी दे रहीं गिर की गाएं, गौ मूत्र में मिले गोल्ड के कण इस समाचार के अनुसार गौमूत्र में सोने के कण पाए गए। यही नहीं 1 लीटर मूत्र में 10 मिलीग्राम तक सोना पाया गया है अर्थात हम गणना करें तो 100 लीटर में 1 ग्राम और 1 तोले सोने के लिए सिर्फ 1000 लीटर गौमूत्र की जरूरत पड़ेगी। आज एक तौले सोने की कीमत 35000 माने तो वह दिन दूर नहीं जब हमारा देश फिर से सोने की चिड़िया होगा।

जब इस तरह की ख़बरें आती हैं तो दूध की मांग में बढ़ोतरी होने लगती है, आस्था और भी मजबूत होती है। आस्था के पीछे डेयरी उद्योग का क्रूर चेहरा सामने आने के बजाय और भी धुंधला होने लगता है जिसे देख पाना और कठिन हो जाता है।

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