डेरी फार्म में बछड़ों के साथ क्रूरता का खुलासा, उपभोक्ता स्तब्ध !

डेरी फार्म में गाय और बछड़ों के साथ होने वाला व्यवहार हमेशा से ही विवादों में रहा है। लेकिन जब क्रूरता के हृदय विदारक दृश्य सामने आते हैं तो डेरी में होने वाली क्रूरता से मुहँ मोड़ना संभव नहीं होता।

ऐसा ही हुआ अमेरिका में, जब इन दिल दहलाने वाली क्रूरताओं का वीडियो देश के प्रमुख समाचार पत्रों की सुर्खियां बना और डेरी उपभोक्ता इन्हें देख कर सन्न रह गए।

डेरी फार्म और नवजात बछड़े

डेरी उद्योग में बछड़ों का पैदा होना एक बहुत ही जरुरी और नियमित प्रक्रिया है। लेकिन पैदा होने वाले आधे बछड़े अवांछित नर होते हैं और बाकी आधी मादा बछिया को ज़िंदा रखना मज़बूरी होती है।

किसी भी उद्योग में ऐसा कोई भी कार्य करने से हमेशा बचा जाता है जिससे नुकसान होता है, और डेरी उद्योग में भी यही नियम लागू होता है। इसलिए अवांछित नर बछड़ों के साथ जो व्यवहार किया जाता है वह अकसर क्रूरता पूर्ण ही होता है।

कोई भी डेयरी फार्म अपना दूध बेचने के लिए इस तरह की branding करते हैं जो उपभोक्ता में यह सन्देश देते हैं कि उनके फार्म में गायें और बछड़ों की बहुत अच्छी तरह से देखभाल की जाती है और सारे पशु बहुत ही ख़ुशी-ख़ुशी अपना दूध इंसानों के लिए देते हैं।

लेकिन हकीकत क्या होती है? यह कोई भी डेरी वाला कभी नहीं बताना चाहता है, और न ही बता सकता है।

गुप्त वीडियो फुटेज से हुए कुछ खुलासे

कुछ समय पूर्व अमेरिका की एक संस्था Animal Recovery Mission (ARM) ने एक ऐसा वीडियो जारी किया जो न केवल मुख्य समाचार पत्रों की सुर्खियां बना वरन उस वीडियो को देख कर डेरी उपभोक्ता भी स्तब्ध रह गए।

जो कुछ समाचार पत्रों ने उस वीडियो के बारे में लिखा है वह ही दिल दहलाने के लिए काफी है।

एक प्रमुख समाचार पत्र The Guardian लिखता है –

फुटेज में यह दिख रहा था की अमेरिका के एक फार्म “Disneyland of agricultural tourism” में नवजात बछड़ों को लातों से मारा जा रहा है। बछड़ों को श्वास के लिए संघर्ष करते हुए दिखाया गया है।

बछड़े अपनी माँ से दूर अपने छोटे से घर में 40C तापमान में रहने को मजबूर हैं और भीषण गर्मी के कारण निर्जलीकरण और कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। यह गर्मी बहुत बछड़ों के मौत का कारण भी बन रही है।

प्रति वर्ष लगभग 600000 पर्यटक फेयर ओक्स फार्म्स डेयरी एडवेंचर, शिकागो, इलिनोइस के दक्षिण में 15,000 गायों के एक डेयरी फार्म पर जाते हैं। यह वह जगह है जहां लोग अपने परिवार के साथ इससे पहले कि फार्म के रेस्त्रां में एक आइसक्रीम का कप खाएं या pork chop खाएं, डेयरी मवेशियों के चारागाह देख सकते हैं और एक नन्हे सूअर के बच्चे को जो अभी जन्मा है।

यह फार्म कोको कोला कम्पनी से सम्बद्ध है जो पोषक तत्वों से भरपूर दूध का उत्पादन करने का दावा करता है। जिसे Fairlife नाम से बेचा जाता है। इसके अतिरिक्त और भी डेरी उत्पाद यहाँ बनाये और बेचे जाते हैं।

कैसे और कब फिल्माया गया यह वीडियो?

इस वीडियो को फिल्माने के लिए एआरएम के अंडरकवर अन्वेषक ने 2018 में बछड़े की देखभाल करने वाले कर्मचारी के रूप में फेयर ओक्स फार्म में नौकरी की। उन्होंने बताया कि उन्हें सिर्फ मृत बछड़ों के शवों को कहाँ कैसे रखना है इसके अतिरिक्त और किसी भी कार्य का प्रशिक्षण नहीं दिया गया।

अगस्त से नवंबर 2018 के बीच बनाये गए इस वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे डेरी के कर्मचारी नवजात बछड़ों को लातों से मारते और खून से लथपथ बछड़ों को इधर से उधर पटकते हैं जबकि उनकी माँ अपने बच्चों के लिए तरसती रहती है।

इस वीडियो पर फार्म की आधिकारिक प्रतिक्रिया

वीडियो सामने आने के बाद कंपनी की वेबसाइट पर पोस्ट किए गए एक बयान में, मैकक्लोस्की ने अपने चार कर्मचारियों और एक तीसरे पक्ष के ट्रक चालक को इस क्रूरता के लिए जिम्मेदार ठहराया। इन कर्मचारियों के बारे में बारे में फार्म मालिक ने कहा कि जो इस क्रूरता के लिए जिम्मेदार हैं उनका अनुबंध समाप्त कर दिया जाएगा।

सबसे आश्चर्यजनक प्रतिक्रिया यह आयी जिसमें मालिक ने कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि नर बछड़ों को मांस (veal) के लिए बेचा जा रहा है।

अन्य डेरी फार्म में क्रूरता के वीडियो

इसी तरह का एक अन्य वीडियो भी ARM ने जारी किया है जिसमें एक Organic dairy farm में जानवरों के साथ होने वाली क्रूरताओं को दिखाया गया है।

भारत के सन्दर्भ में कैसे देखें इन वीडियो को?

यहाँ यह वीडियो भारत के बाहर के जरूर है लेकिन इसका यह मतलब बिलकुल भी नहीं निकाला जाना चाहिए कि इस तरह की क्रूरताएं भारत में नहीं होती है।

क्रूरता हर डेयरी फार्म में होती है। किस मात्रा में होती है और किस तरीके से होती है वह भिन्न-भिन्न हो सकता है, लेकिन इसको नाकारा नहीं जा सकता है।

किसी बछड़े को मारना पीटना ही क्रूरता नहीं है उस बछड़े को जन्म से ही अपनी माँ से अलग कर देना और माँ के दूध से वंचित रखना भी गाय और बछड़े के प्रति क्रूरता ही है।

भारत में गाय को माता कहा गया है इसलिए भारत के बहुत से प्रदेशों में गाय के कत्ल पर प्रतिबन्ध है और इसके लिए दंड का भी प्रावधान है। लेकिन जहाँ गायों और बछड़ों के कत्ल पर प्रतिबन्ध है वहां सड़के आवारा गायों से भरी पड़ी है। गाय, बछड़े और बैल सड़कों पर कूड़ा और प्लास्टिक खा-खा कर बीमार हो रहे हैं औरअसामयिक मौत का शिकार भी हो रहे हैं।

डेरी में बेकार हुई गायों और बछड़ों को सड़कों पर मरने के लिए छोड़ देना भी एक तरह की क्रूरता की श्रेणी में ही आता है। डेरी की बेकार गायें और बछड़े अपना बाकी जीवन आराम से गुज़ार सकें इसके लिए भारत में हज़ारों गौशालाएँ भी बनायीं गयी है लेकिन गौशालाओं की दुर्दशा सर्वविदित है।

क्या गौशालाएं ही आवारा गायों की समस्या के लिए उपयुक्त समाधान है?

भारत में गाय के कत्ल पर प्रतिबन्ध होने के कारण डेरी व्यवसायी को बेकार हुई गाय का कोई मूल्य नहीं मिलता है और उसे मजबूरन उन्हें सड़कों पर छोड़ना पड़ता है। इसलिए भारत के दूध उत्पादन मेंआधे से ज्यादा योगदान भैंसों का होता है जिनके न तो कत्ल पर कोई प्रतिबन्ध है और न ही उनके साथ हुए दुर्व्यवहार के खिलाफ कोई बोलने वाला है।

भारत में भैंसो के साथ वह सब होता है जो ऊपर वीडियो में दिखाया गया है। ज्यादा जानकारी के लिए यह वीडियो देखें।

कुल मिला कर अगर कोई भी डेरी उपभोक्ता यह सोच कर दूध का प्रयोग करता है कि गायें अपनी मर्जी से इंसानों लिए दूध देती है तो वह बहुत ही अँधेरे में है औरअज्ञानवश दूध का प्रयोग कर रहा है लेकिन अगर कोई सब कुछ जानते हुए भी डेयरी उत्पादों का सेवन जारी रखता है तो उसे क्या कहा जाए यह समझना बहुत ही मुश्किल है।

क्या डेयरी, क्रूरता से मुक्त हो सकती है?

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