डेयरी व्यवसाय और एक सांड की पीड़ा!

डेयरी व्यवसाय में गाय की भूमिका तो स्पष्ट नज़र आती है लेकिन इसमें

एक सांड की क्या भूमिका होती है?

किस तरह सांड की भूमिका समय के साथ बदली है?

और क्या सांड भी गाय की तरह इस उद्योग में शोषण का का शिकार हैं?

डेयरी व्यवसाय में सांड की भूमिका

डेयरी उद्योग का आधार ही गाय और सांड के मिलन पर टिका हुआ है। जब कृत्रिम गर्भाधान की शुरुआत नहीं हुई थी तब दूध उत्पादन के लिए गायों को गर्भवती करवाने के लिए सांडों की जरूरत होती थी।

आज हर क्षेत्र में नयी-नयी तकनीकों के साथ-साथ डेयरी व्यवसाय में भी कृत्रिम गर्भाधान की तकनीक आने से सांडों की संख्या महत्वपूर्ण नहीं रही है। न ही सांडों का हर जगह उपलब्ध होना जरुरी है।

दूध उत्पादन के लिए कृत्रिम गर्भाधान के तरीके से किसी एक उन्नत नस्ल के सांड के वीर्य से ही हज़ारों गायों का गर्भधारण करवाया जा सकता है। इसलिए इस व्यवसाय में नर पशु की भूमिका केवल एक वीर्य दाता तक ही सिमित रह गयी है।

कैसे इकठ्ठा किया जाता है किसी सांड का वीर्य?

किसी भी सांड का वीर्य एकत्र करने के मुख्यत: दो तरीके अपनाये जाते हैं। कृत्रिम योनि में वीर्य स्खलित करवा कर या Electroejaculation द्वारा।

पहला तरीका

इस तरीके में धोखे द्वारा सांड का वीर्य एक कृत्रिम योनि में स्खलित करवाया जाता है। इसके लिए 2-3 व्यक्तियों की जरूरत होती है। जिस सांड का वीर्य लिया जाना होता है उसे दूसरे सांड के संपर्क में ला कर उत्तेजित करवाया जाता है और तुरंत एक व्यक्ति स्खलन को कृत्रिम योनि में एकत्र कर लेता है। इस क्रिया को आप नीचे वीडियो में अच्छे से समझ सकते हैं –

दूसरा तरीका

यह तरीका होता है Electroejaculation द्वारा वीर्य स्खलन कर एकत्र करना। जब किसी कारणवश पहला तरीका संभव नहीं हो पाता है तब इस तरके का इस्तेमाल किया जाता है जो कि अप्राकृतिक होने के साथ-साथ पीड़ादायक भी होता है।

इस तरीके से स्खलन करवाने हेतु सांड के मलद्वार में एक उपकरण डाला जाता है जिसे हल्की विद्युत धरा से जोड़ा जाता है।

Photo courtesy WikiHow
Photo courtesy WikiHow

मलद्वार में प्रोस्टेट ग्रंथि के पास इस उपकरण से हलके विद्युतीय झटके दिए जाते हैं। झटके 1-2 सेकंड के अंतराल से दिए जाते हैं जिसे एक चक्र कहा जाता है। इस तरह 2-3 उत्तेजना चक्रों के बाद सांड का वीर्य स्खलित हो जाता है जिसे एक ट्यूब में एकत्र कर लिया जाता है।

क्यों और कैसे गलत है यह कार्य?

किसी भी पशु का उपयोग जब व्यावसायिक कार्यों के लिए किया जाता है उसका शोषण होना निश्चित होता है। यहाँ पर सांडों को कच्ची उम्र में ही इस काम के लिए एक मशीन की तरह प्रयोग किया जाता है और मांग के अनुसार उन्हें वीर्य स्खलन को मजबूर किया जाता है। यह शायद रोज़ भी हो सकता है या सप्ताह में 3-4 बार।

इस तरह लगभग 10 वर्षों तक किसी सांड के शोषण के बाद जब उसके वीर्य की गुणवत्ता कम होने लगती है तब उसे किसी कत्लखाने को बेच कर मुनाफा कमाया जाता है।

क्या इस तरह किसी पशु को अपने स्वार्थ के लिए योन क्रिया के लिए मजबूर करना योन शोषण करना नहीं कहा जाएगा?

डेयरी व्यवसाय में जब भी कोई बछड़ा होता है तो उसके नर होने की संभावनाएं 50% होती है इस तरह रोज पैदा होने वाले हज़ारों बछड़ों में से आधी आबादी नर बछड़ों की होती है लेकिन सभी नर आगे चल कर वीर्य पैदा करने वाले सांड नहीं बनते।

सिर्फ उन्नत किस्म के चुनिंदा बछड़ों को ही इस हेतु तैयार किया जाता है बाकी हज़ारों बछड़ों को

  • या तो सड़कों पर आवारा छोड़ दिया जाता है
  • अथवा अगर उन्हें कृषि कार्यों के लिए प्रयोग में लाना होता है या मांस उत्पादन के लिए तैयार करना हो तो उन्हें नपुंसक बना दिया जाता है जिन्हे हम बैल कहते हैं।

किसी भी सांड को नपुंसक बनाने की प्रक्रिया को Castration कहा जाता है जो कि किसी भी पशु के लिए बेहद दर्दनाक होती है। इस प्रक्रिया तहत बहुत ही युवा अवस्था में सांड के अंडकोषों को या तो हटा दिया जाता है या निष्क्रिय कर दिया जाता है।

नीचे वीडियो में देख सकते हैं कि किस बेरहमी से इस कार्य को अंजाम दिया जाता है।

यह सभी तरह केअत्याचार सिर्फ दूध उत्पादन के लिए किये जाते हैं। अगर आप सोचते हैं कि इन मासूम पशुओं पर इस तरह के अत्याचार नहीं होने चाहिए तो इसका सिर्फ एक ही उपाय है कि हमे दूध और उससे बने उत्पादों का उपयोग पूर्णत: बंद करना होगा।

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