डेयरी गायों का शोषण भी एक नारीवाद का मुद्दा है #MooToo आंदोलन

यह समय है प्रजातियों की परवाह किए बिना सभी मादाओं का सम्मान करने का, नारीवाद को मानव प्रजाति से बाहर अन्य प्रजातियों में भी मुखर करने का।

#MooToo आंदोलन #MeToo को कम नहीं करता बल्कि यह दिखाता है कि नारी का शोषण प्रजातियों को भी पार कर गया है।

प्रजातिवाद और नारीवाद!

क्या है प्रजातिवाद?

प्रजातिवाद एक सोच है कि “मानव होना मानव रूपी पशुओं के लिए गैर-मानव पशुओं की तुलना में अधिक नैतिक अधिकार होने का एक अच्छा कारण है।”

प्रजातिवाद भेदभाव का ही एक रूप है। भेदभाव तब होता है जब किसी को दूसरों की तुलना में कम नैतिक मूल्य दिया जाता है या किसी अनुचित कारण के लिए बदतर व्यवहार किया जाता है। उनके गैर-मानव होने के आधार पर जानवरों के साथ भेदभाव होता है।

क्या है नारीवाद ?

यह विश्वास कि, पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार और अवसर मिलने चाहिए। नारीवाद महिलाओं और पुरुषों के लिए सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और बौद्धिक समानता की वकालत करता है।

यह स्त्री लिंग और नारीवादी मूल्यों के बीच एक कड़ी स्थापित करके शुरू होता है, जिसमें सहयोग, सम्मान, देखभाल, पोषण, अंतर्संबंध, न्याय, इक्विटी, ईमानदारी, संवेदनशीलता, अंतर्ज्ञान, परोपकारिता, निष्पक्षता, नैतिकता और प्रतिबद्धता शामिल है।

क्या है नारीवाद के मुख्य उद्देश्य ?

  • महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने का सामान अधिकार देना।
  • महिला के यौन शोषण को रोकना
  • यौन उत्पीड़न और बलात्कार को रोकना

#MeToo आंदोलन

#MeToo आंदोलन की शुरुआत अफ़्रीकी मूल की तराना बुर्के द्वारा वर्ष 2006 में यौन हिंसा से बची महिलाओं , विशेष रूप से अश्वेत महिलाओं और लड़कियों और गरीब समुदाय की अन्य युवतियों की मदद करने के लिए गयी की थी।

अन्य सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण आंदोलनों के समान, ” #MeToo ” का उद्देश्य महिलाओं द्वारा उन पर हुए योन उत्पीड़न पर चुप्पी तोडना था। इसके शुरू होने के कुछ ही समय में यह MeToo हैशटैग के साथ पूरी दुनिया में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड करने लगा और पूरे विश्व में विभिन्न धर्मों, समुदाय और वर्गों की महिलाओं ने अपनी चुप्पी तोड़ यह स्वीकार किया कि वह भी कभी न कभी योन उत्पीड़न की शिकार हुई है।

#MooToo आंदोलन

लॉस एंजलिस टाइम्स के लेखक और पत्रकार पीटर लोवेनहेम ने MeToo की तर्ज पर MooToo को हैशटैग करते हुए डेयरी उद्योग के बारे में अपने अनुभव साझा किये। उन्होंने हाल ही की तीन घटनाओं का भी जिक्र किया जो दर्शाती है कि अब #MooToo का समय आ गया है।

  • जो बिडेन लॉस एंजिल्स में एक विजय भाषण दे रहे थे तभी डेयरी विरोधी प्रदर्शनकारी अचानक स्टेज पर चढ़ गए जो सभी का ध्यान अपनी और आकर्षित करने में सफल रहे।
  • पिछले महीने डेयरी विरोधी प्रदर्शनकारियों ने नेवादा में एक बर्नी सैंडर्स रैली को बाधित कर मांग की कि वह “डेयरी उद्योग को समर्थन करना बंद कर दे।” तीन महिलाओं ने अपने चेस्ट पर लिखे संदेश “लेट डेयरी डाई” के साथ टॉपलेस होकर परेड की।
  • इस वर्ष के अकादमी पुरस्कार में, जोकिन फीनिक्स ने गायों को कृत्रिम रूप से गर्भाधान करने और फिर उनके बच्चों को “चोरी” करने के लिए डेयरी उद्योग की भर्त्सना की । ऑस्कर अवार्ड में जब जोकिन फीनिक्स ने बयां किया डेयरी गायों का दर्द!

पीटर लोवेनहेम ने अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा –

मैंने आधुनिक डेयरी फार्म के संचालन को देखने में कई साल बिताए, और मैं न तो पशु-अधिकार कार्यकर्ता हूं और न ही मैं राजनीतिक हूं, लेकिन मुझे यह बात पता चली: जिस तरह से हम डेयरी गायों का एक मादा के रूप में शोषण करते हैं उसे एक नारीवादी मुद्दे के रूप में देखा जा सकता है।

मुझे पता चला कि फास्ट फूड हैमबर्गर का अधिकांश हिस्सा मांस से बना होता है – मांस के लिए पैदा किये गए मवेशियों से नहीं – बल्कि डेयरी उद्योग की गायों के मांस से जब उनके दूध उत्पादन में गिरावट आ जाती है।

मुझे यह भी पता चला कि जानवरों की पीड़ा का कारण डेयरी की कार्य प्रणाली है, और इसका बहुत कुछ सम्बन्ध गायों को मादा के रूप में शोषण करने से है।

मेरे अनुभव में, डेयरी गायों को नियमित रूप से दर्द और परेशानी होती है, जिस तरह से उनके साथ व्यवहार किया जाता है वह बीमार हो जाती है और उनका जीवन काल छोटा हो जाता है।

चूंकि एक गाय बछड़े के जन्म के बाद ही दूध देती है, इसलिए उसे अधिक से अधिक दूध उत्पादन के लिए अपने जीवन काल में ज्यादा से ज्यादा समय समय गर्भवती होना जरुरी है। कृत्रिम गर्भाधानकर्ता गायों को एक खड़े स्थिति में रख उनकी योनि में एक 3 फुट धातु की नली डालते हैं जिसे “गर्भाधान बंदूक” के रूप में जाना जाता है और बैल के वीर्य की एक खुराक उसके गर्भाशय तक पहुंचाई जाती है। गाय का कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) कैसे होता है?

एक प्राकृतिक अवस्था में, गाय-बछड़ा बंधन मजबूत होता है, लेकिन मैंने देखा कि डेयरी फार्म में जन्म के चालीस मिनट बाद, “बछड़े प्रबंधक” ने नवजात शिशु को उठाया और बछड़े के लिए बनाये हुए घर में ले गए। बाद में, माँ ने उस घास को सूँघा जहाँ उसका बछड़ा जन्म लेने के बाद लेटा हुआ था।

जन्म देने के बाद, एक गाय स्वाभाविक रूप से नौ महीने से एक वर्ष तक अपने बछड़े को स्तनपान करा सकती है, लेकिन उसके बछड़े को उससे छीन कर उससे ज्यादा से ज्यादा दूध प्राप्त करने के लिए ग्रोथ हार्मोन इंजेक्ट किया जाता है।

प्रकृति में, गाय आसानी से 20 साल तक जीवित रह सकती हैं, लेकिन डेयरी गायों को आम तौर पर जब उसकी दूध देने की क्षमता कम होने लगती है 5 वर्ष बाद ही गौमांस के लिए बेच दिया जाता है।

डेयरी गायों के बीच पैर की क्षति इतनी आम होती है कि फार्म में उनके रहने की जगह और दूध निकालने की मशीन के बीच बहुत कम दूरी रखी जाती है जिससे वह पैरों में तकलीफ होने के बावजूद वहां पहुँच सके। अधिक दूध के उत्पादन के लिए गायों के अप्राकृतिक रूप से बड़े किये गए स्तनों के कारण भी चलने में गायों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

मास्टिटिस, या यूडर का संक्रमण, शायद डेयरी गायों में सबसे आम बीमारी है। ज्यादातर मामलों में, यह संक्रमण उनके गीले और भीड़ भरे स्थान में रहने के कारण होता है। इसके इलाज़ हेतु गायों को भारी मात्रा में एंटीबायोटिक की मात्रा दी जाती है।

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप नियमित या जैविक दूध खरीदते हैं। ज्यादातर मादा डेयरी गाय इन समस्याओं से जूझती हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें डी-हर्निंग, टेल-डॉकिंग आदि पीड़ादायक प्रक्रियायों से भी गुज़ारना पड़ता है।

हमें अपनी गायों को मादा के रूप में सम्मान देना चाहिए न कि उनके शोषण का समर्थन करना चाहिए।

गायों को एक मादा के रूप में सम्मान देने के लिए हमे उनका दूध उनके बछड़े के लिए छोड़ देना चाहिए और अगर जरूरत हो तो हमारे लिए एक गिलास बादाम, सोया या ओट मिल्क, कोई भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

अब जरूरत है न सिर्फ #MeToo बल्कि #MooToo के माध्यम से डेयरी में गायों पर हो रहे अत्याचारों को एक नारीवादी मुद्दा माना जाए और इस हेतु जागरूकता फैलाई जाये।

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